क्या Media ही समाज की आंखें और सोच है ?

  • Post By Admin on sunday, Nov 05,2018 with
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मैं Vivek Chopra सबसे पहले मीडिया को धन्यवाद देना चाहूँगा आज का Media इतना सशक्त हो गया है की अगर चीटी भी निकले तो उसकी न्यूज़ हाथी जैसे भरी भरकम बना दी जाती है। मैं कोई मीडिया की बुराई नहीं कर रहा बल्कि मीडिया की ताकत का एक नमूना समझा रहा हूँ। यही है हमारे समाज का असली चेहरा। अभी हाल ही मैं Delhi की एक लड़की "दामिनी" काल्पनिक नाम उसके साथ क्या हुआ सबने मीडिया से जाना मीडिया ने भी उसको खूब High Light किया जिससे हमारे समाज का एक घिनोना चेहरा सामने आया देश की जनता को पता चला की हमारा समाज आज कोन सी दिशा की और जा रहा है "दामिनी" को इन्साफ दिलाने मैं समाज के सभी वर्ग के लोग सामने आये सबने बहुत सराहनीय कार्य किया सब के सब प्रंशषा के योग्य है। Media के इस प्रयास से जनता जागरूक हुई अच्छा लगा ये सब देख केर की अब जनता जागरूक हो रही है, और जनता ने भी Media के माध्यम से अपने दिल का रोष निकाला......

हम समाज को कहाँ ले जा रहे है ?

  • Post By Admin on sunday, Nov 05,2018 with
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मैं Vivek Chopra , आज के इस आधुनिक समाज मे हमारे बच्चे कोन सी दिशा की और जा रहे है ये सब हमारे सामने है कभी न्यूज़ पेपर मे आता है की कुछ कम उम्र के बच्चो ने अपने ही साथी को kidnap किया और फिरोती की मांग की पर पकडे जाने के डर से उन्होंने उसको मार दिया। हमारे बच्चों ने इतनी क्रूरता कहाँ से आ रही है कोन इनको ये सब सिख रहा है या ये सब इन आधुनिक समाज के बच्चो के दिमाग की खुद की ही उपज है। उनके संस्कार कहाँ चले गए। उनमें इतनी क्रूरता कहाँ से आ गयी वो इतने भावविहीन कैसे हो गए। उनको कोन सी ऐसे आवशयकता पड़ गयी थी की उनको ये घिनोने अपराध करने पड़े। जब कभी ऐसे बच्चो से पुछा जाता है तो वे बोलते है की टीवी पर आने वाले एक क्राइम शो से ऐसी प्रेरणा मिली या ऐसे सोच विकसित हुई, या ये कहें की आसपास का वातावरण उन्हें सिखाता है। प़र क्यों ? हम सब जानते है की चलचित्र समाज का आइना होता है वहां से समाज को एक नयी सोच मिलती है नए विचार आते है व्यक्ति या बच्चे उनको देखकर अपनी सोच को विकसित करते है......

हमारी सामाजिक जिम्मेदारी क्या है ?

  • Post By Admin on sunday, Nov 05,2018 with
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मैं Vivek Chopra, हमारे समाज मैं आजकल इतनी जयादा कुरीतिया आ गयी है की इनको किसी एक के हटाने से नहीं हट सकती हम सबको एकजुट होकर प्रयास करना होगा "एकजुट " का मतलब कोई बहुत बड़ा मोर्चा नहीं निकालना हम सबको केवल अपने आपको बदलना होगा अपनी सोच को अपनी संस्कृति और अपने संस्कारों के हिसाब से बनाना होगा। मेरे हिसाब से अब हम लोगो को कमर कस लेनी चाहिए अपने आपको सुधारने में। जिस प्रकार समाज मैं कहीं बलात्कार, अपहरण, शोसन जैसे घटनाएं हो रही हैं वो कोन कर रहा है, कोई और नहीं हम ही एक दुसरे के साथ ये सब कर रहे है। इसीलिए हम एक दुसरे के उपर आरोप प्रत्यारोप न कर के सिर्फ और सिर्फ अपने आपको अपने संस्कारों के आधार पर बदल डाले और ये न सोचे की वो पहेले अपने आपको बदले तब हम बदले , ऐसा नहीं करे बल्कि अपने आपको उससे पहेले बदल डालो जिससे समाज के और लोगो को एक प्रेरणा मिले और एक एक करके सब अपने आपको बदलना शरू कर दे। हमेशा शुरुआत अपने आप से करे दुसरो से कभी उम्मीद मत करे......

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